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What is summon case, warrant case, cognizance offence, and transit remand , transit bail , non bailable warrant
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कॉग्निजेबल ऑफेंस cognizance of offence
- कानूनी जानकार बताते हैं कि अपराध दो तरह के होते हैं: कॉग्निजेबल ऑफेंस और नॉन काग्निजेबल ऑफेंस।
- कॉग्निजेबल ऑफेंस यानी संज्ञेय अपराध वह अपराध है, जो गंभीर मामला होता है और आमतौर पर ऐसा मामला गैरजमानती अपराध होता है।
- नॉन कॉग्निजेबल ऑफेंस वह अपराध है, जो मामूली होता है और ऐसे मामले में थाने में शिकायती सीधे एफआईआर दर्ज नहीं करा सकता। ऐसे मामले में कोर्ट में शिकायत की जाती है और अगर कोर्ट शिकायत से संतुष्ट हो, तो आरोपी के नाम समन जारी करती है।
कौन भगोड़ा
- हत्या, लूट, डकैती, अपहरण, रेप, चोरी, जालसाजी व धोखाधड़ी आदि कॉग्निजेबल ऑफेंस की श्रेणी में रखे गए हैं। ऐसे मामले में पुलिस सीधे आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।
- सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट डी. बी. गोस्वामी बताते हैं कि यह मामले के जांच अधिकारी पर निर्भर करता है कि वह आरोपी को गिरफ्तार करे या न करे।
- पुलिस आरोपी को पूछताछ के लिए सीआरपीसी की धारा-160 के तहत नोटिस जारी करती है और अगर इसके बाद भी आरोपी पूछताछ के लिए पेश न हो, तो जांच एजेंसी आरोपी को किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है।
- इसके बाद भी अगर आरोपी फरार हो, तो पुलिस आईपीसी की धारा-174 के तहत अलग से केस दर्ज कर सकती है। आरोपी अगर पुलिस के गिरफ्त में न हो, तो पुलिस अदालत के सामने अर्जी दाखिल कर आरोपी को भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई शुरू करने की गुहार लगा सकती।
- इसके तहत दाखिल याचिका पर अदालत आरोपी को 30 दिनों का नोटिस जारी करती है और इसके बाद भी अगर वह पेश न हुआ तो उसके प्रॉपर्टी को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करती है और इसके बाद उसे भगोड़ा घोषित कर दिया जाता है।
गैर जमानती वॉरेंट non bailable warrant
- एडवोकेट मुरारी तिवारी के मुताबिक अगर मामला कोर्ट के सामने हो, तो अदालत पहले आरोपी को समन जारी करती है। या फिर अगर आरोपी जमानत पर है और उसे अमुक तारीख को कोर्ट में पेश कराना है, तो अदालत उसके नाम समन जारी करती है।
- समन के बावजूद अगर आरोपी कोर्ट में पेश नहीं होता, तो उसके नाम जमानती वॉरेंट जारी किया जाता है।
- जमानती वॉरेंट भी कोर्ट जारी करती है। जमानती वॉरेंट के तहत कोर्ट एक अमाउंट तय करती है साथ ही तारीख तय करती है और उक्त तारीख तक वॉरेंट को तामिल करना होता है।
- आरोपी को जब पुलिस गिरफ्तार करती है, तो आरोपी अदालत द्वारा तय अमाउंट का बॉन्ड भरता है और वह अदालत द्वारा तय तारीख पर पेश होता है।
- इसके बाद भी अगर वह अदालत में पेश न हो, तो उसके नाम गैरजमानती वॉरेंट जारी किया जाता है।
- गैरजमानती वॉरेंट के बाद पुलिस सीधे तौर पर आरोपी को गिरफ्तार करती है और कोर्ट में पेश करती है। लेकिन गैरजमानती वॉरेंट के बाद भी अगर कोई आरोपी पेश न हो, तो उसकी संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की जाती है।
ट्रांजिट रिमांड व ट्रांजिट बेल transit remand transit bail
- एडवोकेट अमन सरीन बताते हैं कि अगर आरोपी की गिर?तारी उस शहर से बाहर हुई हो, जिस शहर में उसके खिलाफ केस दर्ज है, तो फिर आरोपी को ट्रांजिट रिमांड के जरिए ही लाया जाता है।
- इसके तहत जांच एजेंसी स्थानीय अदालत में आरोपी को पेश करती है और अदालत को बताती है कि आरोपी के खिलाफ अमुक शहर में केस है, लिहाजा उसे संबंधित अदालत में पेश करना है, इसलिए आरोपी को ले जाने वाले लगने वाले वक्त के हिसाब से ट्रांजिट रिमांड दिया जाए।
- जितने दिनों के लिए ट्रांजिट रिमांड दी जाती है, उतने वक्त में आरोपी को संबंधित अदालत में पेश करना होता है।
- इस दौरान अगर आरोपी चाहे, तो जमानत की अर्जी दाखिल कर सकता है और अदालत से गुहार लगा सकता है कि वह संबंधित अदालत में खुद पेश हो जाएगा लिहाजा उसे ट्रांजिट रिमांड दिया जाए और अदालत चाहे तो ट्रांजिट रिमांड भी दे सकती है।

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