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Important things you should know about the Hindu Marriage Act Muslim law special Marriage Act 1954 in relationship Child Marriage Act
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Important things You should know about the Hindu Marriage Act Muslim law special Marriage Act 1954 in relationship Child Marriage Act in hindi
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कुछ ही समय पहले कोर्ट ने लड़कों की शादी करने की उम्र 18 वर्ष करती है जो पहले 21 वर्ष थी लड़की की शादी की उम्र 18 साल थी जो कि अभी भी 18 साल की है लड़कों की उम्र वयस्क ता कि आयु 18 वर्ष , 21 वर्ष की जगह हो गया है । 2013 संशोधन में लड़कों की वयस्कता 16 वर्ष की आयु कर दी गई थी क्योंकि लड़के रेप जैसे घिनौने अपराध नाबालिक होते हुए भी कार्य करते थे जिस में संशोधन करके उनकी व्यस्तता की आयु 16 वर्ष कर दी गई और अब लड़कों की शादी की आयु 18 वर्ष कर दी गई है जोकि लड़की के समतुल्य है आज हम यहां कुछ मैरिज एक्ट की बात करेंगे....
हिंदू मैरिज ऐक्ट
हिंदू मैरिज ऐक्ट 1955 के तहत 18 साल से कम उम्र की लड़की की अगर शादी होती है तो वह भी अमान्य नहीं है। हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत हिंदू रीति-रिवाज से शादी होनी चाहिए। इसके तहत हिंदू लड़का और लड़की जो प्रोहिबिटेड रिलेशन (नजदीकी रिश्तेदार) और स्पिंडा रिलेशन (पिता की 5 पीढ़ी और मां की 3 पीढ़ी में होना) में न हों, शादी कर सकते हैं। इसके लिए सप्तपदी यानी अग्नि के सामने साथ फेरे और वचन के साथ-साथ अन्य तमाम तरह के रीति-रिवाज का पालन होता है। इसके बाद ही शादी पूर्ण मानी जाती है। लेकिन अगर कोई शख्स 18 साल से कम है और वह शादी करता है तो बालिग होने के बाद ऐसी शादी को अमान्य करार देने के लिए गुहार लगा सकता है। अगर शादी को अमान्य करने के लिए गुहार नहीं लगाई जाती तो शादी मान्य हो जाती है।
मुस्लिम लॉ
एडवोकेट मीना बेगम बताती हैं कि 15 साल या उससे ज्यादा उम्र की मुस्लिम लड़की ने अगर प्यूबर्टी (शारीरिक रूप से बालिग) पा ली है तो वह शादी कर सकती है। ऐसी शादी को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता। मुस्लिम लॉ के तहत निकाह सिविल कॉन्टैक्ट है और निकाह के लिए प्रस्ताव दिया जाता है और लड़की उसे स्वीकार करती है। इसके तहत मेहर की रकम तय होती है जो लड़की को दी जाती है। निकाह कबूल करने के बाद यह पूरा माना जाता है। काजी और गवाह की मौजूदगी में यह निकाह होता है। इसके लिए लड़का और लड़की का मुस्लिम होना जरूरी है।
स्पेशल मैरिज ऐक्ट 1954
एडवोकेट डी. बी. गोस्वामी के मुताबिक, जब लड़का और लड़की बालिग हों और शादी करने की पात्रता रखते हों तो वे अपनी मर्जी से एक-दूसरे के साथ स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत शादी कर सकते हैं। लड़के की उम्र 21 से ज्यादा और लड़की की उम्र 18 से ऊपर होनी चाहिए। दोनों शादी के लिए मैरिज रजिस्ट्रार के सामने आवेदन देते हैं और फिर मैरिज रजिस्ट्रार एक महीने का नोटिस देता है। नोटिस पीरियड में अगर उस नोटिस पर किसी को ऐतराज नहीं है फिर दोनों मैरिज रजिस्ट्रार के सामने पेश होते हैं और फिर रजिस्ट्रार मैरिज रजिस्टर कर देता है। स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत दो अलग-अलग धर्म के लोग भी बिना धर्म बदले शादी कर सकते हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप
सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशंस के बारे में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि ऐसे रिश्ते निभा रही युवतियां कुछ मापदंडों को पूरा करने की स्थिति में ही गुजारा भत्ते की हकदार हो सकती हैं। ऐसी युवतियों को चार शर्तें पूरी करनी होंगी। युवक-युवती को समाज के सामने खुद को पति-पत्नी की तरह पेश करना होगा, दोनों की उम्र कानून के अनुसार शादी के लायक हो, दोनों शादी करने योग्य हों जिनमें अविवाहित होना शामिल है और वे अपनी मर्जी से साथ रह रहे हों और दुनिया के सामने लंबे समय तक खुद को जीवन साथी के रूप में दिखाएं।
चाइल्ड मैरिज ऐक्ट
हाई कोर्ट में सरकारी वकील नवीन शर्मा के मुताबिक चाइल्ड मैरिज ऐक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के की शादी नहीं हो सकती। अगर यह शादी होती है तो वह अमान्य होगी। चाइल्ड मैरिज ऐक्ट के तहत यह प्रावधान है कि अगर कोई ऐसी शादी करता है या फिर करवाता है या इससे लिए उकसाता है और दोषी पाया जाता है तो इस ऐक्ट के तहत दो साल तक कैद की सजा का प्रावधान है और साथ ही एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है
Important things you should know about the Hindu Marriage Act Muslim law special Marriage Act 1954 in relationship Child Marriage Act.


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