Passive Euthanasia

निष्क्रिय इच्छामृत्यु 

passive Euthanasia 
passive Euthanasia

passive Euthanasia


 निष्क्रिय इच्छामृत्यु passive Euthanasia से आशय किसी पीड़ित व्यक्ति के जीवन समर्थन उपकरणों को जानबूझकर हटा लेने से है ताकि उस व्यक्ति को कष्टदायक जीवन से मुक्ति मिल जाए।

यह सर्वप्रथम अरुणा रामचंद्र शानबाग बनाम भारत संघ 2018 के मामले में उच्चतम न्यायालय ने दिया इसके पश्चात 11 मार्च 2018 सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु को संवैधानिक दे। इस मामले में कहा गया था कि कोर्ट की कड़ी निगरानी में असाधारण परिस्थितियों में passive Euthanasia दिया जा सकता है।

सक्रिय इच्छामृत्यु

सक्रिय इच्छामृत्यु से ऐसे किसी पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु के लिए कुछ किया जाए जैसे उसे जहर देकर कष्टदायक जीवन से मुक्ति दे दी जाए।

नोट: भारत में सक्रिय इच्छामृत्यु का कोई स्थान नहीं है।

इच्छा मृत्यु की वसीयत

  

passive Euthanas यह वसीयत एक कानूनी दस्तावेज है जिससे आशय है कि जब किसी व्यक्ति द्वारा स्वस्थ रहते ही पहले से यह घोषित कर दिया जाए कि कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में जीवित रहना चाहेगा अथवा नहीं जब वह गंभीर रूप से बीमार हो तथा जीवन समर्थन उपकरणों के बिना सीख रहे उसकी मृत्यु हो जाना सुनिश्चित हो इच्छा मृत्यु की वसीयत उसी स्थिति में प्रभावी होगी जब कोई व्यक्ति अपनी इच्छाओं को स्वयं अभिव्यक्त नहीं कर सकता।


Note: 

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने इच्छा मृत्यु की वसीयत से के संदर्भ में कहा की पीठ यह भी भीखेगी कि यह वसीयत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हो जिसमें 2 स्वतंत्र गवाह भी हो कोर्ट इस मामले में पर्याप्त सुरक्षा मानक तय करे।

दर्द निवारक दवाओं की लत का संकट

अमेरिका में दर्द निवारक अप्लाइड दवाओं के सेवन से रोजाना 140 लोगों की मौत हो जाती है तथा वर्ष 2016 में अमेरिका में एफबीआई दवाओं के सेवन से मरने वालों की संख्या 59 हजार से अधिक थी यह संख्या बंधु किया मोटर वाहन से मरने वालों की संख्या से बहुत अधिक है विश्व में किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका में दर्द निवारक ओपीआई दवाओं का सेवन करने वाली की संख्या सबसे ज्यादा है।passive Euthanasia

Note: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 26 अक्टूबर 2017 को "opioid Crisis" राष्ट्रीय शर्म करार देते हुए इसे जनस्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया आईटी संकट को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए संघीय धन का त्वरित आवंटन सुगम हो जाएगा जिसका प्रयोग विशेषज्ञों की भर्ती करने व लोगों के इलाज के लिए टेलीमेडिसिन सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए किया जाएगा


निष्क्रिय इच्छामृत्यु 

passive Euthanasia


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